हर दिन आय और ख़र्च मद-दर-मद गिने जाते हैं; अंतर आपका दैनिक संतुलन है। आय: उत्पादन कर (कारख़ाना उत्पादन के मूल्य से), आयकर (वेतन से), बिक्री कर (खपत से), सीमा शुल्क (आयात से), निर्यात आय, वित्त क्षेत्र और पर्यटन। ख़र्च: इमारत रखरखाव, नीति वित्तपोषण, मंत्री वेतन और पेंशन, ऋण ब्याज। अर्थव्यवस्था टैब के बजट कार्ड को छुइए — हर मद का ब्योरा अलग-अलग दिखता है।
चार कर हैं: उत्पादन, आय, बिक्री और शुल्क। आय और बिक्री कर ख़ज़ाना जल्दी भरते हैं पर संतोष और समृद्धि काटते हैं; शुल्क घरेलू उत्पादन बचाता है। छोटे क़दमों में बढ़िए और जनसमर्थन बार पर नज़र रखिए।
ख़ज़ाना ऋणात्मक होते ही आप क़र्ज़ लेते हैं और रोज़ ब्याज चुकाते हैं। क़र्ज़ केवल बजट अधिशेष से चुकता है — इसलिए पहले दैनिक संतुलन धनात्मक कीजिए। क़र्ज़ सीमा पार करे तो आपकी सुविधाएँ ज़बरन बिक्री पर चली जाती हैं।
बजट विवरण खोलिए और सबसे बड़ा ख़र्च ढूँढिए। ठप और घाटे वाली इमारतें बेचिए या ढहाइए, नीति वित्तपोषण घटाइए, उत्पादन को निर्यात की ओर मोड़िए। कर वृद्धि आख़िरी उपाय है; वह संतोष भी घटाती है।