आपकी ख़ुफ़िया ताक़त का आधार आबादी और विकास स्तर से बनता है; मैदान में कितने एजेंट रख सकते हैं, यह ख़ुफ़िया बजट तय करता है। बजट घटाएँगे तो ताक़त भी उसी के साथ गिरेगी।
जासूसी, तोड़फोड़, हड़ताल भड़काना और जनता को उकसाना। दो अलग-अलग पासे फेंके जाते हैं: एक तय करता है कि काम बना या नहीं, दूसरा यह कि किसी ने आप तक पहुँच बनाई या नहीं — ऑपरेशन सफल होकर भी उजागर हो सकता है।
पर्याप्त सबूत हों तो आप मामला दबा सकते हैं, चुपचाप निगरानी रख सकते हैं या खुलकर निंदा कर सकते हैं। अधूरे सबूत पर निंदा जुआ है: ग़लत देश चुना तो असली दोषी बच निकलता है और सिर्फ़ आरोपित देश से आपके रिश्ते बिगड़ते हैं।
प्रति-ख़ुफ़िया ताक़त आप पर होने वाले ऑपरेशनों की सफलता घटाती है और हमलावर के पकड़े जाने की संभावना बढ़ाती है। बजट बढ़ाने पर हमला और बचाव दोनों एक साथ मज़बूत होते हैं।