जनसंख्या अकुशल से लेकर स्नातकोत्तर तक पाँच शिक्षा स्तरों में बँटी है। हर इमारत ख़ास स्तरों के कामगार माँगती है — विश्वविद्यालय-स्नातक न मिलें तो कारख़ाना बिना कर्मचारी पड़ा रहता है और कुछ नहीं बनाता। स्तरवार आपूर्ति और माँग जनसंख्या टैब में देखिए।
लंबी अवधि: उस स्तर का शिक्षा संस्थान बनाइए (हाई स्कूल, विश्वविद्यालय, स्नातकोत्तर संस्थान) — स्नातक बरसों में पूल में जुड़ते हैं। छोटी अवधि: श्रम समझौते से उस स्तर के कामगार विदेश से लाइए, या उस स्तर की माँग करने वाली इमारतों की संख्या घटाइए।
हाँ: श्रम बाज़ार में "कामगार लाएँ" इस्तेमाल कीजिए — सामने वाले देश में उस स्तर पर बेरोज़गार होने चाहिए, और आपका देश आकर्षक होना चाहिए (वेतन, समृद्धि, सुरक्षा)। प्रवास समझौते लगातार प्रवाह भी बनाते हैं; आने वाले आपकी जनसांख्यिकी में जुड़ जाते हैं।
या तो जनसंख्या के लिए पर्याप्त नौकरियाँ नहीं हैं, या नौकरियाँ ग़लत स्तरों पर हैं। रोज़गार पैदा करने वाला उद्योग बनाइए; बेरोज़गारी आय और संतोष दोनों को नीचे खींचती है। स्नातकों की अधिकता हो तो लोग स्वाभाविक रूप से उन स्कूलों में रुचि खो देते हैं।